गुजारिश
गुजारिश
तूफान के हालात है न किसी सफर में रहो,
पक्षियों से है गुजारिश अपने शजर में रहो...
ईद के चांद थे अपने ही घर वालों के लिये,
ये तुम्हारी खुशकिस्मती है उनकी नजर में रहो...
माना बंजारों की तरह घूमें हो डगर डगर,
वक़्त का तकाजा है अपने शहर में रहो...
तुमने खाक छानी है हर गली चौबारे की,
कुछ दिन की तो बात है अपने घर में रहो...
होगी सुबह हर काली रात के बाद,
ये तो तय है हर त्रासदी के बाद...
जीना है तो रहो एहतियात के साथ,
घर में रहो परिवार के साथ...
समझो अपनों को गहराई के साथ,
घर में रहो परिवार के साथ।
Bhaut khub
ReplyDeleteReally nice, very well written.
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