Posts

Few Lines on Corona: COVID-19

कोरोना नहीं होता जैसे हर चमकती चीज का मतलब सोना नहीं होता बस एक बार एक छींक का मतलब कोरोना नहीं होता, केवल पानी से हाथ धोना, हाथ धोना नहीं होता 20 सेकंड साबुन से हाथ धोने पर कोरोना नहीं होता, ऐसे 'खतरनाक वायरस' का इलाज जादू टोना नहीं होता सावधानी साफ सफाई रखने से कोरोना नहीं होता, जागरूकता जानकारी रखने वालों को बाद में रोना नहीं होता भीड़-भाड़ से दूर रहने पर कोरोना नहीं होता, घर से बाहर जाना और लोगों से हाथ मिलाना नहीं होता क्योंकि 'नमस्कार' करने वालों को को रोना नहीं होता, महामारी के दौर में बस हमें धैर्य खोना नहीं होता 'सैनिटाइजर-मास्क' के प्रयोग से कोरोना नहीं होता, समय रहते सचेत होंगे तो अपनों को खोना नहीं होता रोगी स्वयं 'आइसोलेट' हो जाएं तो औरों को कोरोना नहीं होता। - वरुण यादव

गुजारिश

गुजारिश तूफान के हालात है न किसी सफर में रहो, पक्षियों से है गुजारिश अपने शजर में रहो... ईद के चांद थे अपने ही घर वालों के लिये, ये तुम्हारी खुशकिस्मती है उनकी नजर में रहो... माना बंजारों की तरह घूमें हो डगर डगर, वक़्त का तकाजा है अपने शहर में रहो... तुमने खाक छानी है हर गली चौबारे की, कुछ दिन की तो बात है अपने घर में रहो... होगी सुबह हर काली रात के बाद, ये तो तय है हर त्रासदी के बाद... जीना है तो रहो एहतियात के साथ, घर में रहो परिवार के साथ... समझो अपनों को गहराई के साथ, घर में रहो परिवार के साथ।

First One

दोस्तों वैसे तो 21 दिन घर पर खाली समय बैठना सभी के लिए आसान नहीं है अभी तो लगभग एक हफ्ता 2 दिन ही बीते हैं वैसे आज नवरात्रि का शुभ दिन है और नवरात्र में मां की आराधना और वित्त वर्ष की समाप्ति के कुछ काम किए और अब सोचा अगले 12 दिन कैसे गुजारें तभी सोचा इस बहाने कुछ ना कुछ नया लिखना और सीखना चालू किया जाए, इस समय देश कोरोना जैसी जिस मानवीय आपदा से जूझ रहा है आप सभी की सलामती के लिए  एक ही आग्रह करूंगा कि सभी अपने अपने घर पर अपने परिवार के साथ रहें और कुछ नया जरुर सीखें, अपने जीवन के उन अनुभवों को साझा करें जो एकदम अद्भुत थे, आज के इस व्यस्त जीवन में अपने परिवार के लिए समय निकाल पाना कितना अधिक मुश्किल हो गया था । वैसे एक और सरकार ने रामायण महाभारत जैसी लुप्त हो रही धार्मिक धरोहर के लिए फिर से नाटकीय रूपांतरण को दूरदर्शन के माध्यम से चालू किया है यह 21वीं सदी में उस पीढ़ी को समझाने का एक अवसर भी है जो आजकल कार्टून जैसी चीजों से बाहर ही नहीं आ पाते। क्या था भारतवर्ष और हम कितने भाग्यशाली हैं हमने इस पवित्र माटी में जन्म लिया जिस पर साक्षात भगवान ने अवतरित होकर कर्मफल को समझाया, अप...